Search This Blog

Sunday, 24 May 2015

                          गुरु बनाम शिक्षक
वर्तमान समय मे शिक्षा का महत्व जितना बढ़ता जा रहा है, शिक्षक का उतना ही घटता जा रहा है ा आज न ही शिक्षक का वो सम्मान रहा और न ही समाज मे पहले जैसा स्थान, हालांकि मांग कहीं अधिक है क्योंकि शिक्षा लेने वालों की संख्या मे वृद्धि हुई है ा आज जहाँ एक ओर छात्र शिष्य नही रहे तो दूसरी ओर शिक्षक भी गुरु नही रहे, परिस्थितियों ने बहुत कुछ बदल दिया है ा  छात्र मे इस सोच का विकास हुआ है कि वो शिक्षा खरीद रहा है तो शिक्षक मे भी यह धारणा विकसित हुई है कि वह शिक्षा बेच रहा है, अर्थात् गुरु शिष्य की भावना का अंत हो चुका है, जिस तरह पहले शिष्य गुरु के प्रति समर्पण की भावना रखते थे आज तो वो कहीं दिखना तो दूर उसके विषय मे सोचना भी मूर्खता माना जाता है ा
हमारी प्राचीन मान्यताओं या यूँ कहें कि संस्कृति का ह्रास होने का मुख्य कारण पाश्चात्य संभ्यता का विकास ही है, हम पश्चिमी सभ्यता मे अंधे होकर अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं, जिसके कारण आज शिक्षा का क्षेत्र अत्यधिक प्रभावित हुआ है, कुछ स्थानों मे तो ये महज दिखावा बन कर रह गया है ा

No comments:

Post a Comment