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Sunday, 17 April 2016

कर्तव्यविहीन

आज का व्यक्ति क्या चाहे 
बिना परिश्रम सुुख बेशुमार
कर्तव्यों को दिया बिसार 
पाना चाहे सम्पूर्ण अधिकार
कभी आरक्षण और कभी 
मुफ्त बाँटने वाली सरकार
देश चाहें सशक्त और विशाल
कर चुराकर चाहें  
घर में हो टकसाल
पथभ्रमित हो चुके मानव की
इन ख्वाहिशों को बना आधार
सुरक्षा के नाम पर असुरक्षा
बाँट रही सरकार
मेहनत से सब भाग रहे 
मुफ्त की आस में ताक रहे
अवैध जमीन,अवैध सुविधा 
पाने को सब हैं बेकरार
कर्तव्यविहीन क्या चाहे 
कर्म बिना सुख बेशुमार

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