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Wednesday, 7 February 2018

तुम जो गईं मुझे छोड़कर...

तुम जो गईं मुझे छोड़कर
कुछ भी रहा न पास
ज्यों सागर के बीच भी
बुझे न मीन की प्यास।

बाग-बगीचे बारी, पनघट
घर, चौबारा जब भी सोचूँ
हर सूँ तू ही तू दिखती है
हर शय को बस तेरी आस।

जब तक हाथ तेरा सिर पर था
मैं राजकुमारी थी तेरे महल की
हाथ  जो  तूने  हटा  लिया  तो
दुनिया  में  कोई  रहा  न खास।

बाबूजी की हिम्मत तुम थीं
रातें कट जाती थीं करते बात
उन सूनी आँखों की नींद गई
छलकी-छलकी रहतीं हैं उदास।

उस घर में तुम दुनिया थीं मेरी
तुम नहीं तो सब अजनबी हुए
उस घर में बीता एक-एक पल
मेरे लिए तो अब होगा प्रवास।

जब तक तेरी ममता से माँ
भरी थी खुशियों की झोली मेरी
अश्रु से नयन सदा रिक्त रहे
चमका करती खुशियों की उजास।

ममता का आँचल ज्यों ही हटा
जीवन में छाई गम की घटा
नयनों से अश्रु अनवरत बहें
फिरभी बुझे न मेरे हिय की प्यास।

मिट्टी में बसी तेरी खुशबू
पुरवइया में तेरे गीतों की धुन
हर शय में तू ही तू बसती
फिरभी हर शय तुझ बिन उदास।

एकबार तो आ जा मइया मेरी
सीने से फिर से लगा ले मुझे
मेरी बिटिया रानी कह कर
कानों में घोल फिर वही मिठास।
#मालतीमिश्रा

10 comments:

  1. माँ मेरा स्वीकार करो तुम साष्टांगी प्रणाम
    तुम बिन मै हूँ आज अकेला आती याद तमाम
    माँ मेरा स्वीकार करो तुम साष्टांगी प्रणाम

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    1. आदरणीय भाई जी प्रणाम, ब्लॉग पर आपका आना मेरे लिए आशीर्वाद समान है, आभार आपका🙏

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  2. आदरणीय मालती जी -- माँ के बिना जीवन की कल्पना बहुत मर्मान्तक है | माँ का कोई भी विकल्प दुनिया में नहीं | संसार नश्वर है फिर भी माँ का ना होना शायद संसार की सबसे बड़ी रिक्तता है | माँ के लिए बेहतरीन श्रध्दान्जली और मर्मस्पर्शी शब्दों ने आँखें नम कर दी | इसके लिए कोई सांत्वना नहीं होती केवल समय ही मरहम होगा | फिर भी -- सस्नेह शुभकामना आपको |

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    1. रेनू जी माँ है इसका अहसास ही संबल होता है और नहीं है इस अहसास की पीड़ा अब समझ पाई हूँ। आपके सस्नेह सांत्वना पाकर मन को बल मिला धन्यवाद🙏

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  3. प्रिय मीता आप इतने बड़े कुठार पात से गुजरी हमे मालुम ही नही चला।
    आज आपकी रचना का हर शब्द एक विकल शिशू सा आर्त नाद कर रहा है आंखे नम है सखी आपको समय जल्दी ही सामान्यता कि और ले चले मां को हमारी और से अश्रु पूरित श्रृद्धानजली वो चिदांनंदता को प्राप्त हों।
    जय श्री कृष्णा। 🙏।

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    1. मीता निःसंदेह आपके स्नेहिल शब्दों ने जलते मन को शीतलता प्रदान की, सच तो यह है कि अब समझ पाई हूँ कि दूर होने के बाद भी एक बेटी के जीवन में माँ का क्या महत्व होता है। माँ कितनी ही दूर हो पर 'है' यह अहसास ही हमे परिपूर्ण करता है और 'नहीं हैं' इस अहसास ने तो मानों जीवन को ही अधूरा कर दिया। आपके स्नेहपूरित वक्तव्य के लिए आभार मीता 🙏 श्री कृष्णा🙏

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  4. माँ के लिए सांत्वना नहीं होती ....
    सो रही है प्यार से मिट्टी की चादर ओढ़कर
    आज भी माँ क़ब्र से लोरी सुनाती है मुझे
    दूर अंबर में बसेरा है मेरे माँ का मगर
    आज भी वो दिल के कोने में बसाती है मुझे

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    1. नीतू जी सत्य कहा माँ के लिए सांत्वना नहीं होती, आभार आपका🙏

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  5. माँ जीवन का सृजन होती है
    बहुत सुंदर रचना
    सादर

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    1. प्रणाम आदरणीय, बहुत-बहुत आभार ब्लॉग पर आकर प्रोत्साहित करने के लिए।

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