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Wednesday, 28 December 2016

जीवन पानी सा बहता जाए

जीवन पानी सा बहता है
ऊँची-नीची, टेढ़ी-मेढ़ी, 
कंकरीली-पथरीली सी
सँकरी कभी 
और कभी गहरी-उथली
आती बाधाएँ राहों में
पानी अपनी राह बनाता
लड़ता सारी बाधाओं से
अविरल धारा सम कर्मरत रह
हर प्रस्तर को पिघलाता जाए
जीवन पानी सा बहता जाए

आगे आए कष्टों का पर्वत
पर जीवन नहीं रुका करता
राह नई बनाने को
पर्वत काट गिराता है
पथ की दुर्गमता अधिक हो जितनी
प्रण उतना ही यह सबल बनाए
मंजिल अपनी पाने को 
नदिया सम
सागर से मिल जाने को
बाधाओं को परे हटाकर
नई डगर यह रचता जाए
जीवन पानी सा बहता जाए
मालती मिश्रा

8 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शुक्रवार 30 दिसम्बर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    Replies
    1. आभार यशोदा जी।

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    2. आभार यशोदा जी।

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  2. Replies
    1. बहुत-बहुत आभार सुधा जी।

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  3. जीवन पानी सा निर्मल हो और गतिमय हो..इसी सुंदर कामना से नये वर्ष का आरम्भ हो..

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    Replies
    1. बहुत-बहुत आभार अनीता जी, आपको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ

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    2. बहुत-बहुत आभार अनीता जी, आपको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ

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