मंगलवार

ऐ जिंदगी गले लगा ले

ऐ जिंदगी गले लगा ले...

विरक्त हुआ मन तुझसे जब भी
तूने कसकर पकड़ लिया
नई-नई आशाएँ देकर
मोहपाश में जकड़ लिया
ऐ जिंदगी क्या यही तेरे रंग
जिनको मैंने चाहा था
तेरे हर इक गम को मैंने
गले लगा के निबाहा था
भूल के मेरी नादानी को
फिर आशा की किरण जगा दे
ऐ जिंदगी गले लगा ले।

साया भी जब साथ छोड़ दे
ऐसा गहन अँधेरा है
जीवन की जो आस जगा दे
ऐसा न कोई सवेरा है
तेरे हर पल अंक में भरकर
उसको जीभर जीती हूंँ
तार-तार हो चुके हृदय को
उम्मीदों के तार से सीती हूँ
क्यों बन गई आज तू निष्ठुर
क्या है मेरा कसूर बता दे
ऐ जिंदगी गले लगा ले।

©मालती मिश्रा 'मयंती'✍️

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15 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 14 जुलाई 2020 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    उत्तर
    1. सादर आभार आदरणीया, किसी तकनीकी समस्या के कारण कोई भी टिप्पणी दिखाई नहीं दी आज सभी दिखाई दिए हैं।

      हटाएं
  2. नई-नई आशाएँ देकर
    मोहपाश में जकड़ लिया
    सुन्दर प्रस्तुति

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  3. बहुत सुंदर मीता! व्यथा में भीगे स्वर।

    जवाब देंहटाएं
  4. हार्दिक आभार आदरणीया।

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