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Tuesday, 23 June 2015

योग और राजनीति

 
  21 जून 2015 को प्रथम अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस मनाया गया, जिसमे 35,985 लोगों ने राजपथ पर एक साथ भाग लेकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया तथा साथ ही 84 देशों ने एक साथ हिस्सा लेकर एक और कीर्तिमान स्थापित किया, ये दोनों कीर्तिमान 'गिनीज बुक अॉफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' मे दर्ज हुए....192 देशों ने योग करके इस दिन को विश्व योगा दिवस के रूप मे मनाया....भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि भारत ने एक साथ 191 देशों का नेतृत्व किया..भारत और भारतीयों के लिए यह गर्व की बात है..
बीजेपी अध्यक्ष के कथनानुसार (हिंदुस्तान) अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के लिए 21 जून की तिथि का चयन 2011 में बेंगलुरु में योगाचार्यों नें किया था क्योंकि इस दिन यानि 21 जून को सूर्य का तेज यानि ऊर्जा सबसे अधिक धरती को मिलता है...
इसी बात को ध्यान में रखते हुए हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी पिछले वर्ष सितंबर 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने पहले संबोधन के दौरान यह प्रस्ताव रखा जिसका समर्थन 177 देशों ने किया...मोदी जी की पहल पर ही संयुक्त राष्ट्र ने पिछले वर्ष दिसंबर में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया...
निश्चय ही यह भारत के लिए गर्व का विषय है, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह भारत की एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, परंतु चंद स्वार्थी व सत्ता के भूखे लोग इस पर भी राजनीति से नहीं चूके...किसी ने इसे दिखावा कहा तो किसी ने इसे राजनीति चमकाने का जरिया, कुल मिलाकर योग का विरोध चाहे किसी अन्य देश में न हुआ हो परंतु हमारे अपने ही देश मे जमकर हुआ..समाज के किसी एक वर्ग विशेष को आकर्षित करने हेतु इसका विरोध करते हुए इसके वैज्ञानिक व नैतिक पहलुओं को पूर्णतः नजरअंदाज कर दिया गया,
चुनाव से पहले वोट मांगते वक्त राजनीतिक पार्टियाँ स्वयं को सबसे बड़ा देशभक्त दर्शाती हैं जैसे समाज और समाज में रहने वाले लोग ही उनके लिए सर्वोपरि हैं किंतु जब जीत कर वो भलाई करने की स्थिति में आते हैं तब उन्हें सिर्फ अपनी राजनीति ही दिखाई देती है तब यदि वो सत्ता में नहीं हैं तो सत्ता पक्ष द्वारा दी जाने वाली औषधि को भी जहर साबित करने का पूरा प्रयास करते हैं...उस वक्त उनका सिर्फ एक ही मकसद रह जाता है जनता के मध्य सामने वाले की छवि खराब करना, नहीं तो सोचने वाली बात है कि योग से किसी का क्या नुकसान??? यह तो तन-मन को स्वस्थ रखने का एक ऐसा माध्यम है जो सदियों से भारत की धरोहर है, जिसे अपना कर दूसरे देश गर्व कर रहे हैं उसे अपने ही घर में तिरस्कार का सामना करना पड़ रहा है...कोई इसे धर्म से जेड़ रहा है तो कोई राजनीति से और जो जनता को इसके वास्तविक रूप और ध्येय से परिचित करवाना चाहता है उसे ढोंग और राजनीति का दर्जा दिया जा रहा है....
चलिए मान लेते हैं कि ये राजनीति चमकाने का जरिया है, तो जो राजनीति देश को, समाज को और हर व्यक्ति को लाभ पहुँचा रहा हो, उसे अपनाने में आपत्ति क्यों ?  अतिशयोक्ति तो तब हो जाती है जब लोगों ने इसे धर्म से जोड़ दिया यह कहकर कि यह किसी एक धर्म विशेष का प्रचार करता है, तो क्या यह किसी अन्य धर्म के मानने वाले को स्वास्थ्य लाभ देने से इंकार कर देगा..सूर्य नमस्कार से धर्म भ्रष्ट होता है...कभी सूर्य, चंद्र ने भी किसी का धर्म पूछा ?? यदि योग धर्म से जुड़ा होता तो क्या विश्व के दूसरे १९१ देश इसे स्वीकार करते? नहीं क्योंकि सभी को अपना धर्म प्रिय होता है...किन्तु अन्य देशों ने इसमें निहित तथ्य देखे न कि इसमें दर्शाए गए तथ्य ....
68 सालों की आजादी के बाद भी हमारा देश आज भी एक विकासशील देश से विकसित देश  नहीं बन पाया इसका ये एक सबसे अहम् कारण है कि यहाँ निजी हित सर्वोपरि है, देशहित बाद में... यहाँ सभी एक-दूसरे की टाँग खींचनें मे व्यस्त हैं अन्यथा यूँ ही नहीं शून्य की खोज करने वाला, विश्व गुरु कहलाने वाला भारत आज पीछे रह गया.... होना तो यह चाहिए कि देश यदि फिर से विश्वगुरु बनने के मार्ग पर अग्रसर हो रहा है तो उसे सभी का सहयोग मिलना चाहिए ताकि विश्व स्तर पर देश का गौरव बढ़ सके, देश के गौरव में ही देशवासियों का गौरव निहित है यह हमें कदापि नहीं भूलना चाहिए... यदि राजनीतिक पार्टियाँ स्वार्थान्धता के कारण देशहित नहीं देख पातीं तो हम देश वासियों का कर्तव्य है कि जो भी कार्य देश के हितार्थ हो हम उसे पूरा समर्थन और सहयोग दें......

2 comments:

  1. आज समाज में सभी राजनीतिक पार्टियों को सिर्फ अपनी कुर्सी दिखाई दे रही है जिसके चलते योग जैसी प्राचीन विधा को भी राजनीति से जोड़ा जा रहा है, कुर्सी पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए व्यक्ति व समाज के लाभ को दरकिनार कर दिया जाता है...

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  2. आज समाज में सभी राजनीतिक पार्टियों को सिर्फ अपनी कुर्सी दिखाई दे रही है जिसके चलते योग जैसी प्राचीन विधा को भी राजनीति से जोड़ा जा रहा है, कुर्सी पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए व्यक्ति व समाज के लाभ को दरकिनार कर दिया जाता है...

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