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Friday, 25 September 2015

स्कूलों की कामयाबी


मिशनरी स्कूलों की कामयाबी अपार
जुबाँ पर शहद और दिल में तलवार
दिखा कर प्यार ये करते हैं वार
ले करके आड़ ये परोपकार का
निरंतर रहे हैं अपना जीवन सँवार

उत्कृष्ट ज्ञान का करते हैं दावा
उत्तम शिक्षा का करते ये दिखावा
समाज-सेवा का चढ़ा हुआ है खोल
गौर से देखो तो ढोल में मिलेगा पोल

धार्मिक एकता का पाठ हैं पढ़ाते
अन्य धर्मों पर घात हैं लगाते
खुद के त्योहार धूमधाम से मनाते
अन्य की छुट्टियाँ भी हजम कर जाते

इतने पर भी नही इनको सुकून
घर के लिए काम देने का है जुनून
छुट्टी मत लो काम करो
गर इंसा हो तो न आराम करो

इतने पर भी कहाँ इन्हें संतोष
अपमानित न करें जबतक लगाकर दोष
मीठी जुबाँ के पीछे है तीखी तेज तलवार
इनके लिए सर्वोपरि है इनका अहंकार

अपने "मैं" की संतुष्टि हेतु
कितने"हम" को दुत्कारा इन्होंने
अपनी स्वार्थ साधना हेतु
कितने परोपकार को मारा इन्होंने

अपना ईश अपना गौरव
दूजे का ईश्वर महज स्वार्थ सेतु
होता है इनका हर कर्मकांड 
इनकी महत्वाकांक्षा पूर्ति हेतु

इस पर विडंबना हा ये कैसी...
हम पढ़े-लिखे होकर भी लाचार
जीवन लीला की है ये मार
दिल में जहर जुबाँ पर प्यार

नहीं है जिनकी ऐसी फितरत
वो भी हो करके मजबूर
ओढ़ मुखौटा जिम्मेदारी का
कार्य करें बनकर मजदूर

वफा निभाते मन मार कर
उन स्वार्थी मतलबी लोगों से 
जो न समझे मानवता को
जिनका जीवन चले सिर्फ भोगों से

शिक्षार्थ आइए सेवार्थ जाइए
विचार तो हो गए विलुप्त
सेवार्थ खुले विद्यालयों का
घनार्थ भाव भी नहीं गुप्त

शिक्षा बना महज व्यापार
सेवा भाव नहीं आधार
दिखा लोभ उत्तम शिक्षा का
विद्यालयों का लगा बाजार

फैशन के इस नए दौर में
गारंटी की न हो अभिलाषा
अच्छे अंक तो पा ही लेंगे
उत्कृष्टता की करें न आशा

आगे क्या बतलाएँ मित्रों
इन स्कूलों का हम हाल
शिक्षक जो जाएँ शिक्षा देने
उनका हाल बड़ा बेहाल

साभार : मालती मिश्रा

10 comments:

  1. फैशन के इस नए दौर में
    गारंटी की न हो अभिलाषा
    अच्छे अंक तो पा ही लेंगे
    उत्कृष्टता की करें न आशा------ सार्थक और सटीक
    शिक्षा के गिरते स्तर को उजागर करती प्रभावी रचना -

    सादर


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  2. आग्रह है मेरे ब्लॉग में भी सम्मलित हों
    आभार

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  3. हौसला आफ़जाई के लिए शुक्रिया

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  4. बहुत सटीक रचना ।

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  5. धन्यवाद मधूलिका जी

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  6. धन्यवाद मधूलिका जी

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  7. शिक्षा बना महज व्यापार
    सेवा भाव नहीं आधार
    दिखा लोभ उत्तम शिक्षा का
    विद्यालयों का लगा बाजार

    फैशन के इस नए दौर में
    गारंटी की न हो अभिलाषा
    अच्छे अंक तो पा ही लेंगे
    उत्कृष्टता की करें न आशा
    ....सटीक रचना ..

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  8. धन्यवाद कविता जी , आपके शब्द मेरे लिए अनमोल हैं

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  9. धन्यवाद कविता जी , आपके शब्द मेरे लिए अनमोल हैं

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