Search This Blog

Wednesday, 28 March 2018

अलसाए दृग खोल भानु ने
पट खोला अंबर का
निरख-निरख के छवि तटनी में
मन मुदित हुआ दिनकर का
अगुवानी दिवाधीश की करने
तट पर विटप झुक आए
पथ में बिछा सुरभित पंखुड़ियाँ
कर मंगलगान हरषाए।
#मालतीमिश्रा

No comments:

Post a Comment