Search This Blog

Friday, 13 April 2018

विश्वगुरु बन था उभरा, अपना देश महान।
गद्दारों के स्वार्थ में,  बना रहा गुमनाम।।

जीवन में जीता वही, जिसने न मानी हार।
पार हुआ तूफानों से, ले धैर्य की पतवार।।
#मालतीमिश्रा

14 comments:

  1. जय मां हाटेशवरी...
    अनेक रचनाएं पढ़ी...
    पर आप की रचना पसंद आयी...
    हम चाहते हैं इसे अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    इस लिये आप की रचना...
    दिनांक 15/04/2018 को
    पांच लिंकों का आनंद
    पर लिंक की गयी है...
    इस प्रस्तुति में आप भी सादर आमंत्रित है।

    ReplyDelete
    Replies
    1. Kuldeep Thakur ji बहुत-बहुत आभार🙏

      Delete
  2. बहुत खूब... वाह्ह्ह्ह्

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद लोकेश जी🙏

      Delete
  3. बहुत सुन्दर ...उम्दा...
    वाह!!!

    ReplyDelete
    Replies
    1. सुधा जी हृदयतल से आभार व्यक्त कर रही हूँ। ब्लॉग पर आपका आना मन प्रसन्नता से खिल जाता है। ऐसे ही स्नेह बनाए रखें।🙏

      Delete
  4. बहुत ही बढ़िया...विश्‍वगुरु की राह में कौन कौन था रोड़ा...

    ReplyDelete
    Replies
    1. अलकनंदा जी ब्लॉग पर आपका स्वागत है, बहुत-बहुत आभार🙏 शुभ संध्या

      Delete
  5. सुंदर पंक्तियाँ प्रिय मालती जी |सस्नेह --

    ReplyDelete
    Replies
    1. हार्दिक आभार रेनू जी, बहुत प्रसन्नता हुई आपकी प्रतिक्रिया जानकर, स्नेह बनाए रखें, शुभ संध्या🙏

      Delete
  6. बहुत सुंदर कथन थोडे मे विशाल ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. मीता आपको ब्लॉग पर देख कर मन गद्गगद् हो जाता है, आपकी उपस्थिति ही मेरे लिए प्रोत्साहन बन जाता है। शुभ संध्या मीता🙏🙏

      Delete
  7. वाह!!बहुत सुंंदर ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत-बहुत शुक्रिया शुभा जी। शुभ संध्या🙏🙏

      Delete