बुधवार

आतंक का हाथ आंदोलन के साथ...

हमने न किया देश हित
तुमको भी न करने देंगे
नव विकास का मूल मंत्र
जनता को न पढ़ने देंगे

जो वस्तु हमारी हो न सके
न वो हाथ किसी के लगने देंगे
जी-तोड़ करो तुम देशहित
हम देश को उधर न तकने देंगे

अच्छाइयों की उजली किरणों से
बुराइयों की कालिमा न छँटने देंगे
खुद जुर्म का दामन थाम के हम
जुर्म के खिलाफ धरने देंगे

जो आग लगाई है हमने
न वो किसी ठौर बुझने देंगे
पाने को मनचाहा मुकाम
हम पाँव रिपु के न उखड़ने देंगे

गद्दार नजर आते जो तुम्हें
वो शक्ति हमारी सेना के
ये शक्ति न हम घटने देंगे
आतंक न हम मिटने देंगे।
#मालतीमिश्रा

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6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 26.04.2018 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2952 में दिया जाएगा

    धन्यवाद

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  2. तीक्ष्ण कटाक्ष
    सुंदर रचना.
    उम्दा लेखन कि शुभकामनायें


    मेरे ब्लॉग पर भी पधारे कभी....

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सस्नेह आभार रोहिताश जी।
      जरूर आपका ब्लॉग भी पढूँगी।🙏

      हटाएं

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