सोमवार

प्रकृति का नियम

प्रकृति का नियम

बदलाव प्रकृति का नियम है, ठहरी हुई जिंदगी हो या ठहरा हुआ पानी दोनों में ही विकार उत्पन्न हो जाना स्वाभाविक है। नदी सतत बहती रहती है इसीलिए उसका जल स्वच्छ होता है जबकि ठहरे होने के कारण तालाब का पानी कीचड़ और काई से युक्त होता है, किन्तु लगातार चलते रहने की इस प्रक्रिया में परिवर्तन स्वरूप मार्ग बदल जाए तो कोई बात नहीं परंतु नैसर्गिक गुण नहीं बदलने चाहिए। बिना परिश्रम के प्राप्त सफलता भी उतनी महत्वपूर्ण और उपयोगी नहीं होती जितनी कि परिश्रम करके प्राप्त की गई सफलता महत्त्वपूर्ण और उपयोगी होती है। जिस प्रकार समतल मैदानी भाग में लगातार बहने वाली नदी का जल सिर्फ साधारण पानी ही बनकर रह जाता है जो सिंचाई के ही काम आ सकता है, जबकि पर्वतों के दुर्गम, कंकरीले, पथरीले भागों तथा कंदराओं झाड़ियों आदि से मार्ग बनाकर लगातार संघर्ष करते हुए बहने के बाद तमाम जड़ी-बूटियों आदि के सानिध्य में आने से गंगा नदी का जल पावन तथा विभिन्न रोग प्रतिरोधक क्षमता से युक्त हो जाता है।

उपरोक्त उदाहरण को हम मानव जीवन से भी जोड़कर देख सकते हैं, आजकल एकल परिवार का बहुत चलन है। कभी यह प्रथा आवश्यकतावश शुरू हुई होगी। माता-पिता को गांव में छोड़कर बेटा कमाने के लिए शहर या विदेश चला जाता था और फिर मजबूरी में ही सही वहीं वह पत्नी और बच्चों के साथ रहने को विवश होता। धीरे-धीरे यह प्रथा चलन में आ गई और वर्तमान समय में तो परिस्थिति ऐसी हो चुकी है कि एक ही घर में रहते हुए बेटे-बहू वृद्ध माता-पिता को स्वयं से अलग रहने पर विवश कर देते हैं या वृद्धाश्रम भेज देते हैं। आजकल घर में बड़े-बुजुर्गों की सेवा का कष्ट कोई नहीं उठाना चाहता और फलस्वरूप उनका यह आरामपरस्त स्वभाव उनके बच्चों को संस्कारहीन बना देता है। बड़े-बुजुर्गों की सेवा का थोड़ा परिश्रम करते तो बच्चों को दादा-दादी, नाना-नानी की देखभाल, उनका प्यार-दुलार मिलता उनकी कहानियों और नसीहतों से उनमें संस्कार के बीज पनपते और उनकी नैतिकता का पतन नहीं होता। आगे चलकर वही बच्चा बड़े-बुजुर्गों की सेवा और सम्मान सीखता और यही संस्कार वह आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाता किन्तु थोड़ी मेहनत से बचने के लिए न सिर्फ बड़े-बुजुर्गों की आत्मा को दुखाते हैं बल्कि संस्कार रूपी चरित्र निर्माण की औषधि को विराम लगाकर एक विकृत समाज की नींव डाल देते हैं।

मालती मिश्रा 'मयंती'✍️

0 Comments:

Thanks For Visit Here.