मंगलवार


जिस देश की धरती शस्य-श्यामला
हृदय बहे गंग रसधार
जिसके सिर पर मुकुट हिमालय
सागर रहा है पैर पखार
स्वर्ग बसा जिसकी धरा पर
सुरासुर करते जिसका यश गान
जिस धरा पर पाकर जन्म हुए
आर्यभट्ट चाणक्य महान
उस देश को न झुकने देंगे
उस देश को न मिटने देंगे
प्रणों की आहुति भी देंगे
बचाने को इसका सम्मान
मालती मिश्रा

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2 टिप्‍पणियां:

  1. वाह ! लाजवाब ! बहुत सुंदर प्रस्तुति आदरणीया।
    स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ ।

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    1. राजेश कुमार राज जी बहुत-बहुत आभार, आप को भी बीते सभी पर्वों की ढेरों बधाइयाँ।

      हटाएं

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