मंगलवार


यह दुनिया एक रंगमंच है
हर मानव अभिनेता है
जीते हैं सब वही पात्र
जो ऊपर वाला देता है।

चढ़ा मुखौटा जोकर का हम 
दोहरा जीवन जी लेते हैं
छिपा अश्क पलकों के पीछे
बस अधरों से हँस देते हैं।

अपने गम की कीमत पर
लोगों में खुशियाँ बिखराना
नहीं है आसां दुनिया में
यारों जोकर बन जाना।

मालती मिश्रा "मयंती"✍️

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8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत शानदार और सत्य रचना मीता।

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    1. आपकी स्नेहपूरित सराहना मेरी चिंतन शक्ति को उर्वरता प्रदान करती है मीता। धन्यवाद

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  2. चढ़ा मुखौटा जोकर का हम
    दोहरा जीवन जी लेते हैं
    छिपा अश्क पलकों के पीछे
    बस अधरों से हँस देते हैं।
    वाह बहुत खूब 👌👌👌

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    उत्तर
    1. आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया पाकर मन प्रफुल्लित हुआ अनुराधा जी।

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  3. सूचना के लिए तथा रचना को मान देने के लिए आभार आ०

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  4. अपनी प्रतिक्रिया से मेरा उत्साहवर्धन करने के लिए सादर आभार अमित जी🙏

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