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Tuesday, 7 August 2018


यह दुनिया एक रंगमंच है
हर मानव अभिनेता है
जीते हैं सब वही पात्र
जो ऊपर वाला देता है।

चढ़ा मुखौटा जोकर का हम 
दोहरा जीवन जी लेते हैं
छिपा अश्क पलकों के पीछे
बस अधरों से हँस देते हैं।

अपने गम की कीमत पर
लोगों में खुशियाँ बिखराना
नहीं है आसां दुनिया में
यारों जोकर बन जाना।

मालती मिश्रा "मयंती"✍️

10 comments:

  1. अपने गम की कीमत पर
    लोगों में खुशियाँ बिखराना
    नहीं है आसां दुनिया में
    यारों जोकर बन जाना।
    वाह वाह वाह बहुत ही ख़ूबसूरत अल्फ़ाज़ आदरणीया👌👌👌👏👏👏

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    1. अपनी प्रतिक्रिया से मेरा उत्साहवर्धन करने के लिए सादर आभार अमित जी🙏

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  2. बहुत शानदार और सत्य रचना मीता।

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    1. आपकी स्नेहपूरित सराहना मेरी चिंतन शक्ति को उर्वरता प्रदान करती है मीता। धन्यवाद

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  3. चढ़ा मुखौटा जोकर का हम
    दोहरा जीवन जी लेते हैं
    छिपा अश्क पलकों के पीछे
    बस अधरों से हँस देते हैं।
    वाह बहुत खूब 👌👌👌

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    1. आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया पाकर मन प्रफुल्लित हुआ अनुराधा जी।

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  4. Replies
    1. धन्यवाद लोकेश जी

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  5. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 9.8.18 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3058 में दिया जाएगा

    धन्यवाद

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    1. सूचना के लिए तथा रचना को मान देने के लिए आभार आ०

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