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Tuesday, 6 October 2015

माँ..मुझे स्कूल न जाना

                     

माँ री मुझे स्कूल न जाना
तू कहती मुझे ज्ञान मिलेगा
पढ़-लिख कर सम्मान मिलेगा
पढ़ने का ध्येय मैने अबतक न जाना
ऐ माँ मुझे स्कूल न जाना

मास्टर जी बस अंग्रेजी पढ़ाते
हमसे भी अंग्रेजी में बतियाते
अपना देश अपनी भाषा से
माँ हमको है दूर न जाना
माँ हमको स्कूल न जाना

अंग्रेजी की पढ़ाई लाई
पचश्चिमी सभ्यता के हर कर्म
इनमें खोती जाए हे माँ
अपनी संस्कृति अपना धर्म
माँ हमको धरम न खोना 
ऐ माँ हमें स्कूल न जाना

हमने देखा स्कूल के बच्चे
अपनी मातृभाषा में कच्चे
सेवा,आदर,परोपकार की बातें
उन स्कूलों में नहीं बताते
स्कूलों ने अपना कर्तव्य न जाना
सुन माँ हमें स्कूल न जाना

जहाँ गुरू का नही है आदर
दिखावे का सब ओढ़े चादर
अंग्रेजी सभ्यता का पहन के जामा
शिक्षा का बस करते ड्रामा
दिखावे को जहाँ पर धर्म है माना
माँ मुझे ऐसे स्कूल न जाना

प्रार्थना ने जहाँ पहचान है खोई
मानव की मानवता भी सोई
हिंदी हिंदुस्तान की बोली
उन लोगों को लगे बेगाना
माँ मुझे ऐसे स्कूल न जाना

सूट-बूट अनिवार्य बनाकर
बाहर से ये सभ्य दिखाते
अमानुषता का प्रतिपादन कर
मानुषता का पाठ पढ़ाते
प्रेम,सहयोग जहाँ नही पाना
माँ हमें उस स्कूल न जाना

विद्या तो है ज्ञान का मंदिर
होती है जहाँ ज्ञान की पूजा
पर ज्ञान वो कैसे पूर्ण हो माई
जिसमें मातृभाषा न समाई
बिन मातृभाषा कुछ सीखना न सिखाना
मुझको माँ ऐसे स्कूल न जाना

गैर भाषा को मुकुट पहनाते
अपनी भाषा को हीन बताते
माँ का अनादर करे जो संतान 
वो जग में पाए क्यों कर सम्मान
माँ मुझको सम्मान न खोना 
ऐ माँ मुझे स्कूल न जाना

साभार...मालती मिश्रा

6 comments:

  1. गैर भाषा को मुकुट पहनाते
    अपनी भाषा को हीन बताते
    माँ का अनादर करे जो संतान
    वो जग में पाए क्यों कर सम्मान
    माँ मुझको सम्मान न खोना
    ऐ माँ मुझे स्कूल न जाना
    ....बहुत सुन्दर सार्थक चिंतन करती प्रेरक प्रस्तुति

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  2. धन्यवाद कविता रावत जी

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  3. धन्यवाद कविता रावत जी

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  4. सार्थक और सटीक चित्रण
    मन को छूता हुआ ---
    सादर

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  5. धन्यवाद ज्योति खरे जी

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  6. धन्यवाद ज्योति खरे जी

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