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Sunday, 13 November 2016

नेता जी की फिक्र..


नेता जी की फिक्र....
राजनीति से मेरा दूर-दूर का कोई नाता नहीं और न ही मुझे कभी राजनीति में कोई दिलचस्पी रही परंतु अपने देश से हमेशा से प्रेम किया... देशभक्ति का जज़्बा सदा से मन में रहा, हमेशा देश को व्यक्तिगत हितों से ऊपर माना इसीलिए बचपन में जिस किसी नेता को देशहित की बात करते समाचार में सुनती तो वही नेता मेरा पसंदीदा बन जाता। परंतु अब राजनीति का असली चेहरा पहचानने लगी हूँ, जागरूक भी हो गई हूँ, नेताओं की बे सिर-पैर की बातों को भली-भाँति जानने और समझने लगी हूँ तो सोचती हूँ कि ये नेता खुद इतने मूर्ख हैं या जनता को मूर्ख समझते हैं.....
भाजपा की सरकार आई तो विरोधी पार्टियों ने कालाधन वापस लाने की माँग ही नहीं की बल्कि सभी अपने-अपने खाते में पंद्रह लाख का इंतजार करते नजर आ रहे थे। जनता को बस यही कहकर उकसाया जाता रहा कि पंद्रह लाख कब आएँगे आदि। समय-समय पर भ्रष्टाचार, कालाबाजारी समाप्त करने की माँग इन्हीं विरोधी पार्टियों के द्वारा किया जाने लगा....सभी बुद्धिजीवी, समाज और देश के हितैशी नेतागण, मीडिया सभी को कालाबाजारी, भ्रष्टाचार, कालेधन से मुक्त भारत चाहिए था......
हमारी खुशकिस्मती कि हमारे प्रधानमंत्री ने सबकी यानी पूरे देश की माँग को इतनी जल्दी सुन ली कि उतनी जल्दी तो भगवान भी इंसानों की प्रार्थना नहीं सुनता और परिणामस्वरूप बड़े नोटों पर बैन लगा दिया। यह घोषणा अप्रत्याशित थी, किसी ने स्वप्न में भी नहीं सोचा होगा कि ऐसा भी कुछ हो सकता है। बड़े-बड़े नेताओं तक की नींदें उड़ गईं, हाँ कह सकते हैं कि जनता की फिक्र में, उनके पास कौन सा कालाधन रखा था जो उन्हें उसकी चिंता सताती। किसी नेता ने जनता को आराम देने के लिए एक हफ्ते का समय माँगा ताकि वो उन दिनों में जनता के घर-घर जाकर उन्हें छोटे नोट व राशन आदि उपलब्ध करा सकें पर जनता तो मूर्ख है न....इसे कुछ और ही समझ बैठी उसे लग रहा है कि नेता जी अपना कालाधन सफेद करने के लिए एक सप्ताह चाहते हैं। दूसरी तरफ बेचारे परोपकारी दूसरे नेता जी वो इतने गरीब कि उनके घर में छुट्टे तक खत्म हो गए, बेचारे अपने दस बॉडी गार्ड के साथ सिर्फ चार हजार रूपए बदलवाने के लिए चालीस मिनट लाइन में खड़े रहे...अब ये तो हमारे देश की जनता की नासमझी या भोलापन है कि वो पिछले दस-पंद्रह सालों में इन बेचारे नेता जी की सादगी और परोपकारी भावनाओं को समझ न सकी और आज भी नहीं समझ रही....आज भी इसे पब्लिसिटी स्टंट और ड्रामा ही मान रही है। जनता कहती है एक मूर्ख पूरे देश को पप्पू बनाने चला है। खैर आते हैं अगले परोपकारी, गरीबों के हमदर्द, हम आम लोगों में से बने एक खास नेता की ओर....पहले तो इन्हें समझ ही न आया कि मोदी जी ने क्या कर दिया....इसे मोदी जी की साजिश कही जाए या नहीं इसीलिए डेढ़-दो दिन तो जैसे-तैसे संभाला खुद को, फिर बोले तो क्या बोले.........ये स्ट्राइक फर्जी है। पहले पाक आतंकियों पर सैनिकों द्वारा किए गए सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत माँगकर पाक के सपूत की पदवी हासिल कर ली थी अब करेंसी पर स्ट्राइक को फर्जी बता रहे हैं और कहते हैं कि अपने जानने वालों को पहले बता कर आगाह कर दिया था....इन्होंने तो जनता को इतनी बड़ी सूचना दी पर जनता यहाँ भी वैसी ही अनजान और भोली निकली वह कह रही है कि इन्हें तो इल्जाम लगाने की बीमारी है....मान है नहीं इसलिए स्वयं पर किए गए किसी मानहानि के केस से डर नहीं लगता। सोचते हैं इल्जाम लगाकर जनता के मन में शक के बीज बो देते हैं बाद में फसल काट लेंगे पर यहाँ तो जनता के मन में इनके प्रति अविश्वास का वृक्ष उग आया है उसे कैसे काटेंगे?
बात करते हैं एक और नेता.. नहीं नेत्री की, जी हाँ मायावती की तो माया ही निराली है...कहती हैं मोदी जी ने अपना इंतजाम विदेशों में कर लिया है....अब जनता बेचारी ज्यादा किसी का इतिहास भूगोल तो जानती नहीं पर पूछ रही है कि जो विदेशों में हर दूसरे-तीसरे महीने थककर छुट्टियाँ मनाने जाते हैं कभी उनके लिए तो नहीं कहा कि विदेशों में इंतजाम कर लिया....मोदी जी विदेश में किसके साथ रहेंगे? अपनी उन माता श्री के साथ जिन्हें अब भी अपने साथ नहीं रख पाए सिर्फ जनता की सेवा के कारण। जनता समझती है कि मोदी जी ने देशहिके लिए स्वयं को समर्पित कर दिया है और यह देश ही उनका घर और देशवासी ही उनका परिवार हैं। अब तो सभी भोले-भाले नेताओं को समझ लेना चाहिए कि अब भोली-भाली जनता आपके चेहरों के पीछे के चेहरे पढ़ती है और उसके लिए उसे गूगल नहीं करना पड़ता।
यही विरोधी पार्टियाँ कहते नही थकती थीं कि भाजपा तो व्यापारियों की सरकार है यह तो बड़े-बड़े चंदे लेती है आदि-आदि। आज मोदी जी के इस फैसले से  व्यापारियों पर ही सबसे ज्यादा मार पड़ी है पर वो चुप हैं, और आम नागरिक, गरीब जनता की परेशानियाँ सिर्फ कुछ समय की है जो कि जनता भी खुशी-खुशी यह परेशानी उठाने को तैयार है। परंतु यदि सबसे ज्यादा तकलीफ में कोई दिखाई दे रहा है तो वो हैं बड़ी-बड़ी पार्टियों के बड़े-बड़े नेता। बस अपने आँसू छिपाने के लिए गरीब का दामन ढूँढ़ रहे हैं। मोदी जी ने दो अहम् सच्चाई जनता के समक्ष प्रकट कर दिया- पहली ये कि वो व्यापारियों के नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री हैं और दूसरी ये कि कालाधन और भ्रष्टाचार कहाँ अधिक है।
मालती मिश्रा

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