रविवार

आते हैं साल-दर-साल चले जाते हैं,
कुछ कम तो कुछ अधिक
सब पर अपना असर छोड़ जाते हैं।
कुछ देते हैं तो कुछ लेकर भी जाते हैं,
हर पल हर घड़ी के अनुभवों की
खट्टी-मीठी सी सौगात देकर जाते हैं।
जिस साल की कभी एक-एक रात
होती है बड़ी लंबी
वही साल पलक झपकते ही गुजर जाते हैं।
माना कि यह साल सबके लिए न हो सुखकर
पर हर नए साल में
कुछ पुराने मधुर पल याद आते हैं।
#मालतीमिश्रा

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