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Sunday, 14 August 2016

प्रकृति ने तिरंगा फहराया

प्राचीर को भेद कर
अश्वत्थ ऊपर उठ रहा
मानों हाथों में पकड़े भगवा ध्वज
धरणी ने भी कर्तव्य निभाया
हरियाली दे हरा रंग बिखराया
सागर क्यों कर रहता पीछे
मध्य में श्वेत पटल वो खींचे
हम मनुष्यों को पीछे छोड़
प्रकृति ने स्वतंत्रता दिवस मनाया
धरती अंबर ने मिलजुल कर
देखो अद्भुत तिरंगा फहराया 
प्रकृति ने कलियाँ और फूल बरसाया
खग-विहग ने जनगण मंगल गाया
मन देख-देख पुलकित हुआ
लो फिर स्वतंत्रता-दिवस है आया



मालती मिश्रा

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