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हिन्दू नववर्ष का महत्व

हिन्दू नववर्ष का महत्व

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फुरसत के ऐसे पलों की तलाश रहती है कि हम अपनों के संग मिलकर हर्षोल्लास से चिंतामुक्त होकर खुशियाँ मना सकें और इसीलिए जो भी मौका दिखता है लपक लेते हैं। यह आंग्ल नववर्ष भी ऐसा ही एक अवसर है इसे मनाते हुए हम भूल जाते हैं कि हमारी संस्कृति में नववर्ष के रूप में इसका कोई औचित्य ही नहीं है, यह महज अंग्रेजी सभ्यता की देन है जिसका हम आँख बंद करके अनुसरण करते जा रहे हैं।
नववर्ष का तात्पर्य है आने वाले वर्ष में नवीनता आना और हमारा हिन्दी नववर्ष तभी शुरू होता है जब प्रकृति नवीनता धारण करती है। चैत्र माह के शुक्लपक्ष की प्रथम तिथि को जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है, ग्रह-नक्षत्रों के परिवर्तन के साथ नव वर्ष का आगमन होता है। कहा जाता है कि ब्रह्मा ने इसी दिन सृष्टि का निर्माण किया और भगवान विष्णु ने प्रथम अवतार भी इसी दिन लिया था। इसी दिन आर्य समाज की स्थापना हुई थी तथा इसके ठीक नवें दिन भगवान श्री राम  का जन्म हुआ था।
चैत्र मास को मधुमास भी कहा जाता है मधुमास में प्रकृति अपने सौंदर्य के चरमोत्कर्ष पर होती है, पेड़-पौधों में नवीन कोपलों का आगमन तथा मंजरी, कलियाँ और सुरभित पुष्पों का सौंदर्य चारों ओर अपनी छटा बिखेर कर वातावरण के साथ-साथ प्राणी मन में शुद्धता का भाव भर देता है। नवरात्रि का प्रारंभ जन-जन के मन में पावन भावों का संचार करता है। खेतों में पकी फसलें दूर-दूर तक अपनी स्वर्णिम आभा बिखेरती हैं, फसलों की कटाई के समय वातावरण में जो हँसी-मजाक, चहल-पहल देखने को मिलता है उसका अपना ही आनंद होता है। नई फसल के घर आने की खुशी प्रत्येक कृषक को हर्षित करती है।
हिन्दू नववर्ष में मदिरा का नशा नहीं बल्कि नवीनता की खुशी का नशा होता होता है। इस समय प्रकृति के सौंदर्य की मादकता वातावरण में व्याप्त होती है और नववर्ष मनाने का उपक्रम न होते हुए भी चारों ओर रौनक और नवीनता व्याप्त होती है।

मालती मिश्रा 'मयंती'✍️

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4 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 3.1.2019 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3205 में दिया जाएगा

    धन्यवाद

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  2. सार्थक और सटीक विवेचन
    नववर्ष की शुभकामनाएं

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  3. आपको यहाँ देखकर बहुत खुशी हुई आ०, ऐसा लगा साधना सफलता के करीब पहुँच रही है।
    शुभाशीष बनाए रखिएगा, 🙏सादर आभार, आपको भी नववर्ष की मंगलकामनाएँ🙏🙏

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