Search This Blog

Tuesday, 23 February 2016

सरहद पर भारत के वीर जिस ध्वज का आन बढ़ाते हैं

देश बर्बाद करने की जिसने भी जिद ये ठानी है
आवाम नही वो देशद्रोही है ये बात उसे बतानी है 
सरहद पर भारत के वीर जिस ध्वज का आन बढ़ाते हैं 
घर के भीतर उसी तिरंगे को सत्ता के लोभी जलाते हैं 
राष्ट्रद्रोह को खादी धारी विचारों की अभिव्यक्ति बता करके 
जहाँ बनता हो देश का भविष्य वहाँ देश द्रोही बनाते हैं 
हिंदुस्तान में हिंदुत्व को वर्जित करने का षडयंत्र रचाया है 
लेकर सहारा पूर्वजों के नाम का सकल देश पे हक जताते हैं 
आतंकी के मृत्युदंड को शहादत से परिभाषित करके 
भारत माँ के सच्चे सपूतों की शहादत को लजाते हैं 
वेमुला की कायरता भरी आत्महत्या पर आंदोलन करके 
कश्मीर के छः शहीदों की कुर्बानी को छिपाते हैं 
सत्ता में जमने को देश को जाति धर्म के नाम पर बाँटा है 
पहन के सच्चाई की टोपी मफलर जनता को भरमाते हैं 
भारत माँ आज रोती है क्यों ऐसे कपूत पाए हैं 
जो सत्ता को पाने की खातिर हर नीचता पर उतर आए हैं 
मालती मिश्रा




6 comments:

  1. सच कहा आपने ये हमारे शहीदों की शहादतों को नजरअंदाज कर अपनी राजनीति चमकाने मे लगे है।
    इसी परिप्रेक्ष्य मे मैंने भी कुछ लिखने की कोशिश की है एक बार पढकर देखें..जो इंसानियत को मारे, घर-घर लहू बहाये।
    वो किसने 'राम' समझे, किसने 'खुदा' बनाये।।
    ये आतिश नवा से लोग ही, मातम फ़रोश हैं,
    चैन-ओ-अमन का ये वतन, फिर से न डगमगाये।
    उन्हें खून की हर बूंद का, कैसे हिसाब दें,
    जो आँसुऔ की कीमत.........
    http://manishpratapmpsy.blogspot.com/2016/02/blog-post_23.html

    ReplyDelete
  2. बहुत-बहुत आभार मनीष जी

    ReplyDelete
  3. बहुत-बहुत आभार मनीष जी

    ReplyDelete