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Thursday, 30 June 2016

पहले तोलो फिर बोलो

बातों का बतंगड़ बनते मैने बहुत देखा है,
इसीलिए मेरी बातों को सीमित करती रेखा है।
मुझसे जो भी प्रश्न हों करने समक्ष आकर पूछ डालो,
अपनी हर शंका का निदान सीधे मुझसे कर डालो।
गर इधर-उधर भटकोगे तो एक की चार बातें होंगी,
सही उत्तर की खोज में बातों की भूल-भुलैया होगी।
जहाँ से चले गर वहाँ भी वापस तुम पहुँचना चाहो,
बातों में ऐसे उलझोगे वह मार्ग भी खो चुके होगे।
वक्र जाल में खोने से तो बेहतर है कम बात करें हम,
जितनी कम होंगी बातें जालों के तार जुड़ेंगे कम।
कहा किसी विद्वान ने बोलने को जब भी मुँह खोलो,
अपने शब्दों को पहले कसौटी के तराजू में तोलो।
और हर इक बात को पहले तोलो फिर बोलो।
अधिक बतोले हैं जो, वो बात मेरी ये गाँठ बाँध लो,
स्वयं सुरक्षा को ध्यान मे रख क्यों न बातों की दुकान ही खोलो।
न खरीदेगा कोई तुम्हारी बातें,न बाँटोगे बातों की सौगातें,
फिर बातों की कीमत जान कर कम से कम बोलोगे।
और बोलने पहले अपनी बातों का वजन तुम तोलोगे।।
मालती मिश्रा 

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