रविवार

अन्तर्मन की ध्वनि

अन्तर्मन की ध्वनि....
उजला, निर्मल दर्पन
है मेरा अन्तर्मन
छल प्रपंच और स्वार्थ के 
कीचड़ में खिलते कमल सम पावन
यह मेरा अन्तर्मन
दुनिया के रीत भले मन माने
अन्तर्मन सच्चाई पहचाने
मानवता का सदा थामे दामन
यह सच्चा अन्तर्मन
मस्तिष्क के निर्णय का आधार
है लाभ-हानि के पैमाने
अन्तर्मन ही निष्पक्ष रहकर
बस आत्मध्वनि को पहचाने
दुनिया के इस भीड़ मे रहकर
कर्णभेदी शोर के मध्य
मैंने सुनी स्पष्ट ध्वनि जो
वह है मेरे अन्तर्मन की अन्तर्ध्वनि
आत्म स्वार्थ और लाभ-हानि
के विषय में चिंतन छोड़कर
अपने अन्तर्मन की ध्वनि को
उतारा मैंने अन्तर्ध्वनि पर।
मालती मिश्रा

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