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Saturday, 15 October 2016

मिलन की प्यास

नाजुक पंखुड़ियों पर झिलमिलाते 
शबनम से मोती
मानो रोई है रजनी जी भर कर 
जाने से पहले
या अभिनंदन करने को 
प्रियतम दिनेश का
धोई है इक-इक पंखुड़ी और पत्तों को 
पथ में बिछाने से पहले
पाकर स्नेहिल स्पर्श 
रश्मि रथी की पहली रश्मि पुंजों का
खिल-खिल उठे है प्रसून 
मधुकर के गुनगुनाने से पहले
लेकर मिलन की प्यास दिल में 
छिपी झाड़ियों कंदराओं में
इक नजर देख लूँ प्रियतम दिवाकर को 
ताप बढ़ जाने से पहले
नाजुक मखमली पंखुड़ियाँ 
ज्यों खिल उठती हैं किरणों के छूते ही
छा जाती वही सुर्खी रजनी के गालों पे 
अरुण रथ का ध्वज लहराने से पहले
पकड़ दामन निशि नरेश शशांक का 
हो चली बेगानी सी अनमनी
विभावरी रानी थी सकल धरा की जो 
दिवा नरेश भानु के आने से पहले।
मालती मिश्रा

3 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 17 अक्टूबर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद यशोदा जी।

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    2. This comment has been removed by the author.

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