शुक्रवार

चलो छेड़ें स्वच्छता अभियान

चलो छेड़ें स्वच्छता अभियान....

बहुत हो चुका तकनीकी ज्ञान
छोड़ें स्वार्थ और अभिमान
आज सजाएँ मृतप्राय धरा को
लगाकर वृक्ष और बागान
चलो छेड़ें स्वच्छता अभियान

जगे हम लगे जगाने विश्व
कल तक थे जो स्वयं सुप्तप्राय
होकर अपने बीते गौरवकाल से प्रेरित
फिर लगे चलाने नव नव अभियान
शुरू करें.....

जो बना था अग्रज पूर्ण विश्व का
उसकी छवि पर मलिनता है छाई
गौरव इसका फिर चमकाने को
स्थापित करें नव कीर्तिमान
शुरू करें......

कभी विश्वगुरु कहलाता था जो
शिष्य बन खड़ा झुकाकर शीश
वही प्रतिष्ठा पुनः पाने को
तोड़ो बंधन फिर फैलाओ ज्ञान
चलो छेड़ें.......

बनाकर मजाक हौसलों का जो
करते हैं देश का अपमान
उनकी भी दुर्बुद्धि मिटाकर 
करें परिष्कृत उनका ज्ञान
चलो छेड़ें........
मालती मिश्रा

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