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Sunday, 10 June 2018

सुप्रभात🙏🏵️🙏
🌺🌿🌺 🍁🌷🍁 🌻🍂🌹🏵️
अलसाए मन के अंधियारे से
प्रात की स्फूर्ति का हुआ जो मिलन
नव आस जगा मन मुदित हुआ
पाकर नव प्रभा का आचमन
पूरब में क्षितिज सिंदूरी हुआ
दिवापति दिनकर का हुआ आगमन।
फैली  स्वर्णिम आभा चहुँदिश
दमक उठा धरती और गगन
निस्तेज निष्प्राण हो चुके थे जो तत्व
पुलक उठे पाकर नव जीवन
🌺🌿🌺🍁🌹🍁🌸🌷🌸🍂🌱🏵️
#मालतीमिश्रा, दिल्ली

4 comments:

  1. वाह सुनहरी सा काव्य, ज्यों सूर्य मे तूलिका डूबोकर लिख दिया हो आभा युक्त।
    शुभ दिवस मीता।

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    1. मीता आपके स्नेहिल टिप्पणी और उत्साहित कर देने वाली प्रतिक्रिया के लिए दिल से आभार🙏

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  2. हर शब्द अपनी दास्ताँ बयां कर रहा है आगे कुछ कहने की गुंजाईश ही कहाँ है बधाई स्वीकारें
    बहुत दिनों बाद आना हुआ ब्लॉग पर प्रणाम स्वीकार करें

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    1. सादर आभार संजय जी🙏

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