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Thursday, 21 June 2018

योग हमारी धरोहर

21-06-18
विषय- योग

योग शब्द संस्कृत धातु 'युज्' से उत्पन्न हुआ है, जिसका अर्थ है 'जुड़ना' अतः हम कह सकते हैं कि योग आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का कार्य करता है। अलग-अलग ग्रंथों में योग की विभिन्न परिभाषाएँ दी गई हैं।
जैसे- विष्णु पुराण के अनुसार - योगः संयोग इत्युक्तः जीवात्म परमात्मने अर्थात् "जीवात्मा तथा परमात्मा का पूर्णतया मिलन ही योग है।"
(पातंजल योग दर्शन के अनुसार - योगश्चित्तवृत्त निरोधः (1/2) अर्थात् चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है।
भगवद्गीता के अनुसार - सिद्धासिद्धयो समोभूत्वा समत्वं योग उच्चते (2/48) अर्थात् दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत और उष्ण आदि द्वन्दों में सर्वत्र समभाव रखना योग है।
परिभाषाएँ भले ही अलग-अलग हों किन्तु सभी का अर्थ यही है कि अपने भीतर की दुष्प्रवृत्तियों का त्याग करके आत्मा से परमात्मा का मेल ही योग है।

योग हमें अध्यात्म से जोड़ता है, यह विश्व का सबसे प्राचीन विज्ञान है जो हमें शारीरिक और मानसिक व्याधियों से मुक्त रहकर एक स्वस्थ जीवन जीना सिखाते हैं।
योग हमारे महान ऋषि-मुनियों की देन है तथा यह जाति-धर्म और देशगत सीमाओं से परे है। यह मानव मात्र को जीवन जीने की कला सिखाता है, यह व्यायाम या प्राणायाम मात्र नहीं है, यह सिर्फ शारीरक विकारों से ही नहीं मुक्त करता बल्कि यह एक ऐसी साधना है जो मनुष्य के मानसिक विकारों को दूर करके उसके विचारों, भावों को भी शुद्ध करता है। यह मात्र हमारी सांसों से नहीं जुड़ा होता बल्कि हमें आत्मा को परमात्मा से जोड़ना सिखाता है। योग सांसों पर नियंत्रण रखना सिखाता है,
एकाग्रता बढ़ाता है, मानसिक व शारीरिक क्षमता बढ़ाता है, याददाश्त बढ़ाता है, हमारी नकारात्मक सोच को खत्म करके सकारात्मकता का संचार करता है।
योग में मंत्रजाप का भी अपना महत्व है, मंत्र जाप से उत्पन्न होने वाला स्पंदन हमारे शरीर को झंकृत करता है जिससे दुर्भावनाओं को भूल शरीर में एकाग्रचित्तता का सृजन होता है।

योग को किसी एक धर्म से जोड़कर देखना हमारी संकीर्ण सोच का परिचायक है। यह हमारे देश का दुर्भाग्य ही है जो योग को राजनीति का शिकार होना पड़ा और इसे एक धर्म या संप्रदाय से जोड़ दिया गया।
योग की महत्ता बहुत ही विस्तृत है। योग के इस महत्व को विश्व ने समझा और इसीलिए इसे खुले दिल से अपनाकर लाभान्वित हो रहे हैं।

मालती मिश्रा, दिल्ली✍️

4 comments:

  1. प्रिय मालती जी -- योग दिवस पर सामयिक चिंतन भरा लेख योग को प्रेरित करता बड़ी सरलता से योग के मुख्य बिंदूओं को उकेरता है |सचमुच योग को हम जीवन का महत्वपूर्ण अंग मान लें तो कई आधि- व्याधियों से छुटकारा संभव है
    हार्दिक शुभ कामनाएं |

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    1. आ० रेनू जी सराहना करके प्रेरित करने के सराहनीय कार्य के लिय सादर आभार।

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  2. आज योग सभी देश धर्म के लोगों में विभिन्न रूपों में फ़ैल रहा है यह अच्छी बात है, स्वस्थ रहने के लिए योग जरुरी है यह सभी समझ गए है और जो नादान बनते हैं वे भी समझ रहे है
    बहुत अच्छी सामयिक प्रस्तुति

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    1. आ०कविता जी प्रोत्साहित करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

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